कविता :- 16(87) , इंक़लाब पत्रिका,

कविता :- 16(87),मोबाइल कॉन्फ्रेंस पर,समज्ञा कविता-16
(74) भारत के प्रतिभशाली कवि एवं कवयित्री साझा काव्य

नमन 🙏 :- मेरी कलम मेरी पूजा कीर्तिमान साहित्य मंच,
तिथि :- 09/07/2020 , दिवस :- गुरुवार
विधा :- कविता ,  विषय :- चांदनी रात

जब मिले रहे तब रही चांदनी रात ,
फिर दूर हुई, हुई ख़त्म बात  ।
हम अकेले तुम तो हो न किसी और के साथ ,
इसी आस में हम रोशन जी रहा हूं
कहीं फिर न हो जाएं मुलाक़ात ।

क्या देखी कर्म या जात
गर्मी में आई चल गई आते ही बरसात ।
भींगे पर पकड़े न किसी और का हाथ ,
आज भी इंतजार है, पुनः कब आयेगी चांदनी रात ।।

मिलन होगी , होगी बात ,
सड़क किनारे होगी कहीं मुलाक़ात ।
पर हम अकेले वे रहेंगे प्रिय साथ
आ जा रे , आ जा रे मेरी चांदनी रात ।।

✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज कोलकाता
ग्राम :- झोंझी , मधुबनी, बिहार


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रिहान प्रतापगढ़ संचालक :-
मोबाइल कॉन्फ्रेंस पर कवि सम्मेलन , गुरुवार 09/07/2020
4 जन ( यश मिश्रा ) कविता :-16(87)
6290640716 पर समय :-14:00-15:00
Ncc 77/R mirpara road ashirbad bawan Liluah वाला फोटो । विकास पाठक ऑफिस में
(1) विषय :-।  -: मौन हूँ अनभिज्ञ नहीं  !:- कविता :-16(29)
(2) हम चाह रहे थे जिसे (3) ज़िन्दगी में बहार है
(4) मां सुन लो मेरी कविता :- 10(07)


कविता         हिन्दी काव्य कोश      ✍️ रोशन कुमार झा
विषय :-।  -: मौन हूँ अनभिज्ञ नहीं  !:-

मौन हूँ , तो मैं अनजान नहीं ,
चुप हूँ, तो क्या मेरा पहचान नहीं ।
कोरोना तेरे कारण खुला हुआ बाज़ार
और दुकान नहीं ,
तू कोरोना जायेगा, तुम से डरने वाला
हमारा हिन्दुस्तान नहीं ।

प्रेम है , अभिमान नहीं ,
व्यर्थ हमारा ज्ञान नहीं ।
पीछे हटा मेरा कला और विज्ञान नहीं ,
तू जायेगा कोरोना
इसलिए मौन हूं , पर अज्ञान नहीं ।

हूं हम रोशन बेरोज़गार पर चीन तुम्हारे जैसा
हम भारतीय बेईमान नहीं ,
मार - काट करने पर हमारा ध्यान नहीं ,
तू क्या समझा कोरोना ,
तुम्हारे भगाने के लिए कोई विद्वान नहीं ।।

बन रही है सुझाव चुपके से , अभी कहीं भान नहीं ,
इसलिए मौन हूं , तो क्या मेरे होंठों पर मुस्कान नहीं ।
बंद है भारत दुनिया के साथ तो क्या हुआ
तू कोरोना महान नहीं ,
कष्ट दूर करेंगे प्रभु , तू क्या समझा हम मानव के
लिए भगवान नहीं ।

✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता,  कविता :-16(29)
9399146207 रिहान प्रतापगढ़ संचालक :-
मोबाइल कॉन्फ्रेंस पर कवि सम्मेलन , गुरुवार 09/07/2020
4 जन ( यश मिश्रा :- 6392515917 ) कविता :-16(87)
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10-05-2020 रविवार कविता:-16(27)

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कविता

हम चाह रहे थे जिसे
वह किसी और से वफा निभा रहे थें .

हम उनके साथ का सपना सजा रहे थे ,
वह किसी के साथ सपनो को हकीकत बना रहे थे .

हम अभी प्यार की धुन (छुन ) ही बना रहे थे ,
वह किसी के साथ प्यार का गीत गा रहे थे .

हम इजहार -ए- ईश्क चाह रहे थे ,
वह किसी के साथ बहारे - ए - ईश्क (इश्क ) लुटा रहे थे .

हुआ जो हकीकत से सामना ,
दिल मुझे अपना पड़ा धामना .

उनके बागों में फुल (फूल ) खिले ,
हमारी बागियों में कॉटो के सिल सिले .

अंधेरे रातो में भी उनके चेहरों पर उज्जवलता ,
कड़ी धूपो में भी हमारी चेहरों अंधकारो से भरी हुई .

पतझड़ में भी उनके होंठों पर मुस्कुराहट आयी ,
भरी बंसत में हमारी आंखें डब - डबाई  .

क्यो उम्मीद टुटती नहीं प्यार पाने की ,
दर्द सहनी पड़ती है, दूर जाने की  .

उसके आने से हर रोज एक आस जागती रही ,
उसके जाने से हर रोज़ एक-एक निराशा बढ़ती रही .

रोशन कुमार झा
कक्षा : 12 बी
विभाग : कला (आर्ट्रस )
विद्यालय : सलकिया विक्रम विद्यालय
कोलकाता, रविवार ,25 दिसंबर 2016
भारत एक नज़र में प्रकाशित कविता
आज 13-05-2020 बुधवार कविता :-16(30)

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कविता:- आधुनिक प्यार की परिणाम

ज़िन्दगी में बहार है , सुखों का पहाड़ है ,
मोहब्बत की दरिया दिल से बह रही है.
ख्यालों में तो हमेशा वही रह रही हैं ,
उन्हें पता भी नहीं, और हम रोशन पर आशिक़ी चल रही है.
वह दूसरों के बाहों में झुल रही है,
हमारे दिल में अरमान फल फूल रही है.
वह किसी के होंठों के रस को पीती है,
हम उनके ख्यालों में ही जीते हैं,
वह सफल पायी किसी के प्यार में ,
हम धोखा पाये उसी के ख्याल में,
कल तो वह घुमेगी कार में,
हम रोयेंगे बाज़ार में !
वह कल जनसंख्या बढ़ायेगी, किसी के प्रेम लुटाकर ,
हम जनसंख्या नियंत्रित करेंगे खुद को मिटाकर

® ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता
26-03-2017 रविवार  मो:-6290640716
রোশন কুমার ঝা, Roshan Kumar Jha
26-03-2017 रविवार 12 राजनीतिक विज्ञान की 27
परीक्षा,नेहा को पढ़ाये 11, भारत एक नज़र समाचार पत्र
सच्चाई की ललकार में प्रकाशित  (रोशन ) आज का 27-04-2020 सोमवार कविता :-16(07)
http://roshanjha9997.blogspot.com/2020/04/1607.html
-: प्रभु बुला रही है राधा,आकर दूर करो कोरोना भरी बाधा !:-
http://roshanjha9997.blogspot.com/2020/04/1606_26.html
अब करोना को मिटा जाओ। (19)
हरिओम चन्दीर   एम ए़ ए़़  शोधार्थी ।
एल एन एम यू दरभंगा हिन्दी  विभाग (बिहार)
000000000000000 (19 no) मेरा :-27 कुल:-36
wow well written very relevant to present conditions stay safe
https://allpoetry.com/Roshan_Kumar_jha
https://nojoto.com/profile/97b5a68f954092778473e1e14525e828/roshan-kumar-jha आज से कविता:-16(05)
कविता:-10(007) मां सुन लो मेरी कविता !
https://youtu.be/YYhvZWUkTL0
http://roshanjha9997.blogspot.com/2020/04/1597-1598-1585.html
https://www.rachanakar.org/2020/04/blog-post_476.html
https://youtu.be/HWYK0_XY8l0 रचनाकार
https://youtu.be/tpKuaCMwauY :-16(06)

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http://kalamlive.blogspot.com/2020/05/19-15.html
10-05-2020 रविवार 00:25 ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
http://kavyaaprajita.in/काव्यांकुर/श्री-रोशन-कुमार-झा/
Intex से रेलवे new year
कविता :-10(007) हिन्दी

-: मां सुन लो मेरी कविता !:-

मां मैं लिखा हूं एक कविता ,
सुन लो मेरी कविता !
कैसे सुनू बेटा मैं तेरी कविता ,
भुखमरी, बेरोजगारी से जल रही है चिता ,
कैसे सुनूं बेटा मैं तेरी कविता !

जाओ कविता पापा को सुनाना ,
तब तक मैं बनाकर रख रहीं हूं खाना !

पापा-पापा मैं लिखा हूं एक कविता ,
बोल बेटा कहां से जीता !
जीता नहीं पापा मैं लिखा हूं एक कविता ,

कहां है अब राम और सीता ,
ना पापा राम-सीता नहीं , मैं लिखा हूं एक कविता !

अरे ! खाना जुटता ही नहीं , मैं कैसे शराब पीता ,
न-न पापा आप शराबी नहीं, मैं लिखा हूं एक कविता !

अच्छा कविता,
सुनाओ वही सुनाना जो मेरे जीवन में बीता !
बस-बस पापा वैसा ही कविता !!

सूर्य के रोशन, चांद सितारों की शीतलता में आप
पर रहीं भुखमरी की ताप ,
उसके बावजूद भी बड़े स्नेह से हमें पाले पापा आप !

बड़े संघर्षमय से आपकी जिन्दगी बीता ,
हमें रहा नहीं गया, पापा
बस आप पर लिख बैठे एक कविता !!

               🙏 धन्यवाद ! 💐🌹

® ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता भारत
02-01-2019 बुधवार  07:50
Intex मोबाइल से कविता:-10(007) होना चाहिए
:- 10(07) मां सुन लो मेरी कविता !
রোশন কুমার ঝা, Roshan Kumar Jha
03-05-2020 रविवार  मो:-6290640716

प्रिय साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी मित्रों, भारत के प्रतिभशाली कवि एवं कवयित्री साझा काव्य संग्रह गूगल प्लेस्टोर पर निःशुल्क उप्लब्ध है।
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ये देखें क्रमांक :- 16 पृष्ठ :- 87

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http://roshanjha9997.blogspot.com/2020/06/1674.html
नमन 🙏 :- समज्ञा हिन्दी समाचार पत्र
-: मौन हूँ अनभिज्ञ नहीं  !:-

मौन हूँ , तो मैं अनजान नहीं ,
चुप हूँ, तो क्या मेरा पहचान नहीं ।
कोरोना तेरे कारण खुला हुआ बाज़ार
और दुकान नहीं ,
तू कोरोना जायेगा, तुम से डरने वाला
हमारा हिन्दुस्तान नहीं ।

प्रेम है , अभिमान नहीं ,
व्यर्थ हमारा ज्ञान नहीं ।
पीछे हटा मेरा कला और विज्ञान नहीं ,
तू जायेगा कोरोना
इसलिए मौन हूं , पर अज्ञान नहीं ।

हूं हम रोशन बेरोज़गार पर चीन तुम्हारे जैसा
हम भारतीय बेईमान नहीं ,
मार - काट करने पर हमारा ध्यान नहीं ,
तू क्या समझा कोरोना ,
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बन रही है सुझाव चुपके से , अभी कहीं भान नहीं ,
इसलिए मौन हूं , तो क्या मेरे होंठों पर मुस्कान नहीं ।
बंद है भारत दुनिया के साथ तो क्या हुआ
तू कोरोना महान नहीं ,
कष्ट दूर करेंगे प्रभु , तू क्या समझा हम मानव के
लिए भगवान नहीं ।

✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता

यह हमारी स्वरचित, मौलिक रचना है इसे समज्ञा समाचार पत्र में प्रकाशित करने का अनुमति देता हूं । धन्यवाद

4 सितंबर 2016 में मेरी पहली कविता   रेलगाड़ी की उचित व्यवहार समज्ञा में प्रकाशित हुआ रहा , उस वक्त सलकिया विक्रम विद्यालय में पढ़ते रहे , तब से आज तक रचना करते आ रहे है ।
समज्ञा :- +91 98745 55256
सर बोले Ok आज वृहस्पतिवार 09/07/2020


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