कविता :- 16(90) हिन्दी
कविता :- 16(90)
12-07-2020 रविवार
हरा भरा यह जीवन है ,
कुछ पाने की ही इच्छा रखने वाला यह मन है ,
सबके साथ और सबके लिए रोशन है ,
बाद में सब पहले कमाना धन है ।।
नमन 🙏 :- कलम बोलती है साहित्य समूह
प्रतियोगिता क्रमांक :- 5
तिथि :- 12/07/2020
दिवस :- रविवार
विधा :- लघुकथा
क्या बताऊं , हम उस दादी माँ की अस्तित्व बताने जा रहा हूं जो माँ की अस्तित्व ले ली । दो बहन और एक भाई के बाद दुनिया में आई आनंदनी , वही आनंदनी आनंद का बहन,उसी झोंझीफूलदाई दादी माँ की बात है, आनंदनी के जन्म लेते ही उसकी जीवन रोशन से अंधकार हो गया, वह कैसे ? तो जानिए जन्म लेते ही दो वर्ष की उम्र में ही दिल्ली में आनंदनी की माँ सुधा की मृत्यु हो गई, पिता अरुण दिल्ली में कमाने के लिए रह गया, और दादी अपने बेटे अरूण को छोड़कर अपनी पोती आनंदनी को लेकर गांव आ गई, आनंदनी जन्म से ही विकलांग या उपचार न होने के कारण कमज़ोर हो गई रही , माथा बड़ा पर हाथ पांव पतला पतला , आस-पास के लोग न चलने के कारण उसे लोटिया ,लोटिया कहने लगे यहां तक कि अब ये जिन्दा न रह पायेगी ,मर जायेगी और भी कुछ , ये सब सुनने के बाद भी दादी माँ हार नहीं मानी । तनु वक्ष स्थल से धन्यवाद उस दादी माँ को देना चाहता हूँ , जो वृद्धावस्था में भी आनंदनी को बिना दवा दिए, खुद के मेहनत सरसों तेल से मालिश कर करके आनंदनी को चलाने की प्रयास में लगी रही, और एक दिन ऐसा आया वह चलने फिरने लगी और अपने आसपास के लोगों के काम में वह बेचारी आनंदनी हाथ बढ़ाने लगी, इस तरह आनंदनी अपने गांव में बिना माँ की ही दादी माँ की सहयोग से अपनी अस्तित्व बना ली जो कि अधिकांश बच्चे माँ के रहते हुए भी वह अस्तित्व नहीं बना पाते ।
रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज, कोलकाता
ग्राम :- झोंझी , मधुबनी , बिहार , कविता :- 16(84)
नमन 🙏 :- मेरी कलम मेरी पूजा कीर्तिमान साहित्य मंच,
तिथि :- 12/07/2020 , दिवस :- रविवार
विधा :- कविता , विषय :- अधुरी मोहब्बत
दिल में आग लगाकर चल गई वह सावन में ,
कैसे न जाती, एक दो न उसकी प्रिय है बावन में
छोड़ गई अंधेरा न , रोशन में
ऐसे भी कोई बदलते, वह बदल गई कुछ ही क्षण में ।
आग लगाई तन मन में ,
आज भी चर्चा है मेरे प्यार की जन जन में ।
कह गई कि तू चले जाओ वन में ,
सही कही क्योंकि देवों के देव ,महादेव के
पूजा करना रहा सावन में ।।
आज भी वह बसती है मेरे कण - कण में ,
यही दुआ करूँगा, जब भी वह दिखे,
दिखे वह हमें प्रसन्न में ।।
रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज, कोलकाता
ग्राम :- झोंझी , मधुबनी , बिहार
कविता :- 16(80)
प्रिय साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी मित्रों, भारत के प्रतिभशाली कवि एवं कवयित्री साझा काव्य संग्रह गूगल प्लेस्टोर पर निःशुल्क उप्लब्ध है।
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ये देखें क्रमांक :- 16 पृष्ठ :- 87
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http://roshanjha9997.blogspot.com/2020/06/1674.html
प्रमाण पत्र आया पर ग़लती के कारण फिर से 15/07/2020
* नमन 🙏 :-:राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान*
निशुल्क साझा संग्रह (काव्य) के लिए रचनाएं :-
कविता :- 01
-: बेटियाँ तुम्हारी भलाई हो !:-
मैं नमक रोटी खाऊं , पर तुम्हारे लिए मलाई हो ,
वही करूं हम रोशन जिससे तुम्हारी बेटियाँ भलाई हो !
बेटियाँ तुम्हारे लिए हमें जग से लड़ाई हो ,
आगे तुम चलना और तुम्हारे आगे मेरी कलाई हो !
ऐसा नियम हो ग़लत की पकड़ाई हो ,
वही पढ़ूं , जिसमें बहन और बेटियों की भलाई हो !
तुम बहन, बेटियाँ क्यों डराई हो ,
उठो , उठो तुम तो तिरंगा फहराई हो !!
मेरे लिए नहीं , तुम्हारे लिए मिठाई हो ,
सपना है मेरी,
बेटियाँ की अपने मन से ही विदाई हो !
तब तक उसकी पढ़ाई हो ,
बहन की साथ निभाये , सिर्फ भारत का ही नहीं,
निभाने के लिए दुनिया का ऐसा भाई हो !
आगे बढ़ने से जो बेटियों को रोकें, उस पर कारवाई हो ,
उसी पर इतिहास बनें जो, बेटियों की सुख-सुविधा
के लिए कुछ न कुछ बनवायी हो !
तुम बेटियाँ ही लक्ष्मी , तू ही धन लायी हो ,
आगे बढ़ बहन पीछे-पीछे हम तुम्हारा भाई हो !
कविता :- 2
-: आइए वीर हनुमान तोड़िए कोरोना की गुमान !:-
कोरोना भगाने में असफल रहा कला और विज्ञान ,
तब हम निर्धन रोशन का पुकार सुनिए भगवान !
आइए आप ही पवनपुत्र वीर हनुमान ,
और तोड़िए ये दुष्ट कोरोना की गुमान !!
साईकिल से हवाई जहाज तक बनायें इंसान ,
पर आज कोरोना जैसी मुसीबत में
व्यर्थ रहा हम मानव के ज्ञान !
कोरोना भगाने के लिए लगाकर आयें अनुमान ,
तब अब जल्दी आईयें रामभक्त वीर हनुमान !!
वह शक्ति दो घर पर रहकर सरकार के नीति नियम लूं मान ,
बंद पड़े हैं, हाट, बाज़ार , दुकान !
पर्वत लिए उठा , आप में है परम शक्ति हनुमान ,
तब कोरोना से दूर करों प्रभु ! ताकि हम भारतीय
फिर से नव जीवन पाकर करूं भारत मां की चुमान !!
मां सरस्वती की दया से लिखा हूं कविता,भले ही मैं
रोशन कोरोना में हो जाऊं कुर्बान ,
पर हे! राम अपने भक्त हनुमान के माध्यम से
लौटा दे धरती की मुस्कान !
ये सिर्फ हमारी नहीं, समस्त मानव जाति की है ज़ुबान ,
तब कोरोना भगाने के लिए सिर्फ एक बार आ जाओ
पवनपुत्र हनुमान !!
कविता :- 3
-: हम सब अतिथि है !:-
सब यहां अतिथि है ,
सुख-दुख से जीवन बीती है !
आना-जाना ही तो रीति है ,
अमीर हो या गरीब अंतिम संस्कार के लिए
तो यही मिट्टी है !!
जीव-जंतु हाथी और चींटी है ,
क्या कहूं मैं रोशन यह ज़िन्दगी भी मीठी है !
जन्म लिए तो मरने का भी एक तिथि है ,
क्या हम क्या आप , हम सभी यहां के अतिथि है !!
जो कल जवान रहें, वही आज बूढ़ा हुए ,
समय के साथ कृष्ण-राधा भी जुदा हुए !
अमृत भी विष, विष भी समय के साथ सुधा हुए ,
समय की बात है यारों , समय बदलते होशियार भी बेहूदा हुए !
एक मां की ही बेटा सम्पत्ति बांटने में भाग लेते ,
पत्नी आते ही मां-बाप को त्याग देते !
जिसे पाल पोस कर बड़ा करते वही संतान अंतिम
वक्त आग देते ,
सब मतलबी है यारों , सिर्फ अपना काम पर ही दिमाग़ देते !!
तो कोई दिमाग़ लगाकर भी हारा , कोई हार
के बाद भी जीती हैं ,
सफलता-असफलता ही तो जिन्दगी की नीति है !
जिंदगी पूजा पाठ,लेखन कार्य ,अर्थ व्यवस्था, संस्कृति
और राजनीति में ही बीती है ,
तब हम आप नहीं ,कहों यारों हम सब अतिथि है !!
कविता :- 4
-: वह अब हैं न मेरी दिवानी ! !:-
हम जो कहें वह मानी नहीं ,
इसलिए वह आज मेरी रानी नहीं !
उससे बढ़कर कोई स्यानी नहीं ,
दुनिया के लिए समंदर हूं , पर अपने पास
पीने के लिए पानी नहीं !!
उसके अलावा मेरी कोई कहानी नहीं ,
जगा हुआ है मेरी सोई हुई वाणी नहीं !
अब लाभ- हानि नहीं ,
क्योंकि अब कोई मेरी दिवानी नहीं !!
उसके लिए हमसे बढ़कर कोई दानी नहीं ,
देते रहे, लेती रही उससे बढ़कर कोई स्यानी नहीं !
पता रहा छोड़कर जायेगी , फिर भी लुटाये हम रोशन
से बढ़कर कोई अज्ञानी नहीं ,
प्यार- मोहब्बत से जो दूर रहा उससे
बढ़कर कोई ज्ञानी नहीं !!
हम रहें कुत्ता , वह कानी नहीं ,
सब कुछ देखी , फिर भी वह मुझे अपना मानी नहीं !
मुझे अपना बनाने के लिए वह कभी भी
अपने मन में ठानी नहीं ,
इसलिए वह आज मेरी रानी नहीं !
परिचय
नाम :- रोशन कुमार झा
जन्मतिथि :- 13/06/1999
पिता :- श्री श्रीष्टु झा
कार्य :- बी.ए की छात्र, एन.सी.सी, एन.एस.एस, सेंट जॉन एम्बुलेंस कोलकाता, विश्व साहित्य संस्थान ,भारत स्काउट एण्ड गाइड के सदस्य, विगत तीन वर्षों से 11 वीं व 12 वीं कक्षा के विज्ञान व वाणिज्य विभाग को हिन्दी एवं कला विभाग के छात्र - छात्राओं को समस्त विषयों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करते आये है।
पता :- ग्राम :- झोंझी , मधुबनी, बिहार
मो :-6290640716
ई - मेल :- Roshanjha9997@gmail. com
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*राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान*
निशुल्क साझा संग्रह (काव्य)
संस्थान द्वारा साझा संग्रह निकालने का निर्णय लिया गया है जिसमे संस्था के सभी सद्स्य सम्मिलित हो सकते है!
आपको 4 पेज रचना के लिये एवं 1 पेज परिचय+फोटो के लिये दिया जायेगा !
कुल पेज 4+1 = 5
आप अपनी रचना माननीय अध्यक्ष महोदय नवल पाल प्रभाकर "दिनकर" जी या मेरे नम्बर पर भेज सकते है! कही एक जगह !
जिसमे रचना प्रूफ रीडिंग के साथ 4 रचना + 1 (पेज का परिचय + फोटो)
अंतिम दिनांक रचना भेजने का- 31 जुलाई 2020
पुस्तक - पेपरबैक एवं pdf, ईबुक सबमे प्रकाशित होगा !
*वरिष्ठ सम्पादक -*
नवल पाल प्रभाकर 'दिनकर'
*सम्पादक -*
रुपेश कुमार
*उपसम्पादक -*
निक्की शर्मा 'रश्मि'
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Sanskrit :- 8240408960
*साहित्य संगम संस्थान की उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा दिनांक १९/०७/२०२० दिन रविवार को आयोजित द्वितीय मासिक ऑनलाइन कवि गोष्ठी में आप सभी साहित्य मनीषियों का हार्दिक स्वागत है। कार्यक्रम में सम्मिलित होने के इच्छुक साथी शुक्रवार रात 9 बजे तक नीचे क्रमशः अपना नाम अंकित कर सकते हैं-------*
1-
2- सूर्यदीप कुशवाहा, वाराणसी
3- राज वीर सिंह
4- रोशन कुमार झा , कोलकाता
5-
6-
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*आज शाम 4:30 में संपूर्ण बिहार युवा विकास मंच परिवार कि बैठक होगी।*
Topic: बिहार युवा विकास मंच
*Time: Jul 12, 2020 04:30-5:10 PM Mumbai, Kolkata, New Delhi*
*Join Zoom Meeting* *मीटिंग ज्वॉइन करने की लिंक 4:30 से:-👇*
https://us04web.zoom.us/j/5605564075?pwd=RFN3MEliV3l5b3JScGFiaTNtZ1Btdz09
*Meeting ID: 560 556 4075*
*Password: 8V9SyQ*
*समय 5:10 से*
*मीटिंग लिंक यहां से डायरेक्ट जुड़ें:-👇👇*
https://us04web.zoom.us/j/5605564075?pwd=RFN3MEliV3l5b3JScGFiaTNtZ1Btdz09
*Meeting ID: 560 556 4075*
*Password: 8V9SyQ*
कल नेहा भाई आकाश फोन किया SMS देखने के लिए NiOS का रहा IGNOU का 8777866004
आज पूजा 560 रिचार्ज करवायी
*साहित्य संगम संस्थान की उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा दिनांक १९/०७/२०२० दिन रविवार को आयोजित द्वितीय मासिक ऑनलाइन कवि गोष्ठी में आप सभी साहित्य मनीषियों का हार्दिक स्वागत है। कार्यक्रम में सम्मिलित होने के इच्छुक साथी शुक्रवार रात 9 बजे तक नीचे क्रमशः अपना नाम अंकित कर सकते हैं-------*
1-
2- सूर्यदीप कुशवाहा, वाराणसी
3- राज वीर सिंह
4- दीपक मेहरा ,रायसेन म.प्र.
5- विनोद वर्मा 'दुर्गेश'
6-अंशु प्रिया अग्रवाल ओमान
7-आशुतोष कुमार पटना बिहार
8-
9-सुनैना गुप्ता
10-रीतू गुलाटी..ऋतंभरा
11-सुमति श्रीवास्तव
12-क्षितिज जैन "अनघ", जयपुर, राजस्थान
13-मिथलेश सिंह मिलिंद आजमगढ़
14-सुनीति केशरवानी 'नीति'
15- रोशन कुमार झा , कोलकाता
http://roshanjha9997.blogspot.com/2020/07/1689.html
जो भी साहित्यकार साझा संग्रह के लिये माननीय नवल पाल प्रभाकर 'दिनकर' जी या रुपेश कुमार जी को रचना भेज चुके हो वे अपना नाम लिखते जाए!
1. गजेंद्र कुमार घोगरे - वाशिम (महा)
2. साधना मिश्रा विंध्य उत्तर प्रदेश लखनऊ
3.राम शरण सेठ, प्रवक्ता डायट फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश
4.anuja Manu Lucknow
5.आशुकवि प्रशान्त कुमार"पी.के.",पाली हरदोई (उत्तर प्रदेश)
6. विजय तन्हा,,, शाहजहाँपुर
7.sheetal Vijay Bhuteshwar Gondia ( Maharashtra)
8
9डाॅ विजय लक्ष्मी काठगोदाम उत्तराखण्ड
10. रोशन कुमार झा , कोलकाता