कविता :- 16(78), मानवता लघुकथा, संगम सवेरा

कविता :-16(78)

नमन 🙏 :- साहित्य संगम संस्थान
दिनांक :- 30-06-2020
दिवस :- मंगलवार
विषय :- जल के संचय
विधा :- छंद
विषय प्रदाता :- आ. शिवानी शुक्ला जी

जाकर विद्यालय, कॉलेज, विश्वविद्यालय ,
जानें सदियों से है, और रहेंगे हिमालय ।
फिर भी है हम रोशन को भविष्य का भय ,
इसलिए सोचा हूं, कि मैं करूं जल संचय ।‌।

ताकि काम आये ये जल,
यहां वहां , आज न कल ।
काम आते ज़िन्दगी भर ,
तब जल बचाने चल ।

® ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता 
ग्राम :- झोंझी, मधुबनी, बिहार

नमस्ते 🙏 :- कलम ✍️ बोलती है साहित्य समूह
विषय क्रमांक :- 167
दिनांक :- 30-06-2020
दिवस :-  मंगलवार
विषय :- दर्द
विधा :- हाइकु
संचालक :- आ. स्नेहलता द्विवेदी जी

है जो ये दर्द
तुने दी उपहार
गये बाज़ार

लेने को कोई
हुआ नहीं तैयार
वापस आये

घर में कहीं
मैं रोशन कुमार
साथी अपना

दर्द है आज
खुशी वे दुख पर
है हमें नाज़

® ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता भारत
ग्राम :- झोंझी, मधुबनी, बिहार
मो :- 6290640716

चयनित आज 77 पर रोशन कुमार झा
कविता :- 16(50) नमन 🙏 :- संगम सवेरा

" संगम सवेरा"- मासिक ई पत्रिका जुलाई 2020 अंक हेतु स्वरचित लघुकथा ।

-: बेटियाँ ऐसी हो । :-

झोंझीकुमारपुर  में तनु , नेहा, पूजा, मुस्कान और वर्षा एक ही कक्षा में पढ़ने वाली पाँच सहेली रहती रही,सब के सब धनी पर तनु ग़रीब होते हुए भी मन से धनी, भले अपने खाती या न खाती पर अपने गाँव में दूसरे को भूखा नहीं रहने देती, सब तो ट्यूशन पढ़ती पर तनु नहीं , माँ सरस्वती की दया उस पर रही, एक समय ऐसा आया कि उनकी चारों सहेलीयाँ भी उसी से पढ़ने लगी, और कहती यार तू इस तरह समझाती हो क्या बताऊं,सब सहेलीयाँ दुर्गा पूजा में नई नई कपड़ा लेती , पर तनु अपनी पढ़ाकर कमाई हुई पैसों से ग़रीबों की राह रोशन करती,अपने गांव के आसपास के गांवों के ग़रीब बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाती,एक दिन जब तनु बच्चों को पढ़ाती रही तभी नेहा आकर बोली बहन तुम पढ़ाती रहो, हम तुम्हारी व पढ़ते हुए बच्चों की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर समाजसेवी नाम से डाल देंगे, फिर क्या तुम बहुत दूर तक चली जाओगी, इतने में तनु बोल उठी , न बहन हमें दूर तक नहीं जाना,एक ग़रीब का दर्द दूसरा ग़रीब ही जानते,छवि खींचाकर ग़रीबी का मज़ाक नहीं उड़ा सकती, अगर धनी होती तो अपने पैसों से कई विद्यालय खोल देती,पर नहीं हूं, पर मेरी जो भी ज्ञान है उसे तो बाँट ही सकती हूं, गर्व है हमें तनु जैसी बेटियाँ पर, हे ईश्वर हर कहीं तनु जैसी बेटियाँ हो ।।

✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज कोलकाता
नमन 🙏 :- साहित्य संगम संस्थान
तिथि :- 02-06-2020

कविता:-16(58) नमन 🙏 :- साहित्य संगम संस्थान
विषय :- मानवता , विधा :- संवाद, दिनांक :- 10/06/2020
दिवस :- बुधवार

मानवता मतलब मानव जो अपने घर परिवार समाज के लिए जो भलाई करता, इसके प्रमुख रूप दया, प्रेम , सहनशीलता , संघर्ष आदि है । यहाँ हम मानवता से सम्बंधित रचना प्रस्तुत किये है । :-

नमन 🙏  :- साहित्य उत्थान ,विषय :- मानवता 
विधा :- लघुकथा,  दिनांक :- 09/06/2020
दिवस :- मंगलवार

बात हम बग़ल वाली की ही कर रहा हूँ, वही कोमल , बेबी, मीना की, उसकी नहीं उसकी मानवता की, वह तीनों मानव सेवा को पूजा पाठ और अपना धर्म मानती, तीनों अंधेरा में रोशन,दुख में सुख करके आनंद करने वाली, कुछ देकर तो कुछ अपनी मधुर वचन से वह कैसे तो जानिए, उन तीनों की घर की आसपास राखी नाम की ग़रीब लड़की रहती रही ,बेचारी पढ़ना चाहती पर कैसे पढ़ती, लेकिन पढ़ी भी वह कैसे ? .  तो वही कोमल , बेबी, मीना, राहुल , राजन के सहयोग से, पांचों मिलकर राखी की विद्यालय की शुल्क जमा करते, उसे किताब कॉपी खरीदकर देते और अरुण निःशुल्क ही पढ़ाते ,इस तरह राखी बारहवीं तक पढ़ी ,उन लोगों के सहयोग से । तो इस लघु कथा से हमें यही सीख मिलती है , कि हमें भी समाज में कुछ करना चाहिए, किसी को भी अपनी सहयोग से नव जीवन देना चाहिए ।।

® ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता  भारत
ग्राम :- झोंझी, मधुबनी, बिहार
मो :- 6290640716 कविता :-16(57)
आज कविता :- 16(78) मंगलवार 30/06/2020
81 रोशन कुमार झा

12 वीं कक्षा 2018-19 की कोमल, बेबी, मीना,पर लिखें लघुकथा आज प्रकाशित, धन्यवाद सह सादर प्रणाम 🙏💐💐💐💐💐💐💐 ईश्वर,खुदा, मसीहा

हे जून 2020 तू खुशी दिया ग़म दिया,
जाते जाते भी खुशी देकर ही जाओगे ।

पूजा जी तुम भी हो इस लघुकथा में

अरुण चाचा आपको भी इस लघुकथा में प्रमुख पात्र दिये है

https://issuu.com/care.designworld/docs/manavta/82

बहन राखी , भाई राहुल, राजन , आनंद तू भी हो इस लघुकथा में उदास मत होना ।


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