कविता :- 16(52),लेख,मैथिली कविता, ग़ज़ल,Redmi3s से
कविता :- 16(52), लेख, मैथिली कविता, संगम सवेरा,ग़ज़ल :-
नमस्ते 🙏 :- कलम ✍️ बोलती है साहित्य समूह
विषय क्रमांक :-145
दिनांक :- 04-06-2020
दिवस :- गुरुवार
विषय :- आत्म निर्भर भारत
विधा :- लेख
संचालक :- आ. कन्हैयालाल गुप्ता जी
हमारा भारत कृषि प्रधान व पशु पालन देश है, और भारत आत्म निर्भर देशों में से एक देश है, हम चाहे तो हम खुद ही इतना उत्पादन कर सकते है कि हम दूसरे देश को भी सहायता कर सकते है, और हमारा भारत सदियों से सहायता करते रहे हैं । सन् 2015 में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत को आत्म निर्भर बनाने के लिए (Pmkvy ) पीएमकेवीवाई " प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी संस्था की शुरुआत किये इस संस्था का उद्देश्य लोगों को विभिन्न विद्या में अल्प ज्ञान देकर स्वरोजगार देना, और भारत के हर एक नागरिक के राह रोशन करके भारत को आत्म निर्भर बनाना, आज जो कोरोना से विश्व संकट में है,क्या कहूं कल विश्व साईकिल दिवस रहा, कल हम कोलकाता के हावड़ा ब्रिज देखकर आश्चर्य हुए, कि बस ,कार से ज़्यादा साईकिल ही साईकिल ,ये कोरोना लोगों को आत्म निर्भर बनाने के लिए ही आये हुए है, कैसे तो जानिए, पहले लोग बस, ट्रेन आदि पर निर्भर रहते रहे, उसमें भी उतनी भीड़ की क्या कहूं, जब हम खुद आत्म निर्भर होंगे, हमसे हमारा समाज , समाज से हमारा जिला, जिला से हमारा राज्य और राज्य से विश्व प्यारा हमारा देश भारत आत्म निर्भर होंगे, जय हिन्द,जय भारत ।।
✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज कोलकाता भारत
मो :-6290640716
नमन 🙏 :- साहित्य संगम संस्थान
तिथि :- 04-06-2020
दिवस :- गुरुवार
विषय :- मुक्त
विधा :- ग़ज़ल
विषय प्रदाता :- आ. डॉ राकेश सक्सेना महागुरुदेव जी
ज़िन्दगी में बहार है , सुखों का पहाड़ है ,
मोहब्बत की दरिया दिल से बह रही है ।
ख्यालों में तो हमेशा वही रह रही हैं ,
हम रोशन पर आशिक़ी चढ़ रही है ।
खुद वह दूसरों के बाहों में झुल रही है,
हमारे दिल में अरमान फल फूल रही है ।
वह किसी के होंठों के रस को पीती है,
हम उनके ख्यालों में ही वैसे ही जीते हैं ।
वह सफल पायी किसी के प्यार में ,
हम धोखा पाये उसी के ख्याल में ।
कल तो वह घुमेगी कार में,
हम यूं ही रोयेंगे बाज़ार में !
वह कल जनसंख्या बढ़ायेगी, किसी के प्रेम लुटाकर ,
हम यूं जनसंख्या नियंत्रित करेंगे खुद को मिटाकर ।
® ✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता भारत
मो :-6290640716
कविता:-16(52) मैथिली ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
Roshan Kumar Jha, রোশন কুমার ঝা
-: अही हमर रूप छी ।
अंहा ज्ञानी , हम बेवकूफ़ छी ,
हम रोशन छाया, अहाँ हमर धूप छी ।
सुन्दरी बहुत, पर अही हमर सुन्दर रूप छी ,
शोभा नैइ दैत अछि, अहाँ जे अन्ना चुप छी ।।
अहाँ एक, अहाँ के चाहअ वाला अछि बहुत ,
हम सही कहैत छि, कहैय छी नैइ झूठ ।
पता नैई अहाँ के पायब कऽ जीतता किनकर पुत्र ,
अहाँ छी सुन्दरी, अहाँ के रूप अछि अद्भुत ।।
हमरो अछि अहाँ सऽ प्यार ,
पर अहाँ के अछि कईयों यार ।
तहन अहाँ कनअ्ह करब हमर देखभाल ,
लागैयत अछि अहाँ बिना हम रहब अन्ना हीअ कुमार ।।
✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज कोलकाता
मो :- 6290640716
04-06-2020 वृहस्पतिवार
नमस्ते 🙏 :- साहित्यसार मंच
विषय :- बरसात
विधा :- कविता
दिनांक :- 04-06-2020
दिवस :- गुरुवार
हर मौसम को आना है,करके नव प्रभात ,
अभी कहाँ अंत, अभी तो हुए ही है शुरूआत ।
गर्मी, सरदी आये बरसात ,
तब न भरी रहेगी नदी की घाट ।।
पूछता न धर्म, न जात ,
करता न किसी से कोई बात ।
चलता बाज़ार और हाट
समय पर ही होता बरसात ।।
पानी भरता खेत में ,
तब दाना,जाता पेट में
हम रोशन मुस्कुराते रेत में ,
बरसात से ही अन्न उपजता
उपजाकर किसान बदलता सेठ में ।।
✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज कोलकाता भारत
मो :-6290640716
नमन 🙏 :- संगम सवेरा
" संगम सवेरा"- मासिक ई पत्रिका जुलाई 2020 अंक हेतु स्वरचित लघुकथा ।
-: बेटियाँ ऐसी हो । :-
झोंझीकुमारपुर में तनु , नेहा, पूजा, मुस्कान और वर्षा एक ही कक्षा में पढ़ने वाली पाँच सहेली रहती रही,सब के सब धनी पर तनु ग़रीब होते हुए भी मन से धनी, भले अपने खाती या न खाती पर अपने गाँव में दूसरे को भूखा नहीं रहने देती, सब तो ट्यूशन पढ़ती पर तनु नहीं , माँ सरस्वती की दया उस पर रही, एक समय ऐसा आया कि उनकी चारों सहेलीयाँ भी उसी से पढ़ने लगी, और कहती यार तू इस तरह समझाती हो क्या बताऊं,सब सहेलीयाँ दुर्गा पूजा में नई नई कपड़ा लेती , पर तनु अपनी पढ़ाकर कमाई हुई पैसों से ग़रीबों की राह रोशन करती,अपने गांव के आसपास के गांवों के ग़रीब बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाती,एक दिन जब तनु बच्चों को पढ़ाती रही तभी नेहा आकर बोली बहन तुम पढ़ाती रहो, हम तुम्हारी व पढ़ते हुए बच्चों की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर समाजसेवी नाम से डाल देंगे, फिर क्या तुम बहुत दूर तक चली जाओगी, इतने में तनु बोल उठी , न बहन हमें दूर तक नहीं जाना,एक ग़रीब का दर्द दूसरा ग़रीब ही जानते,छवि खींचाकर ग़रीबी का मज़ाक नहीं उड़ा सकती, अगर धनी होती तो अपने पैसों से कई विद्यालय खोल देती,पर नहीं हूं, पर मेरी जो भी ज्ञान है उसे तो बाँट ही सकती हूं। गर्व है हमें तनु जैसी बेटियाँ पर, हे ईश्वर हर कहीं तनु जैसी बेटियाँ हो ।।
✍️ रोशन कुमार झा
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज कोलकाता
04-06-2020 गुरुवार
कविता :- 16(50) मंगलवार 02-06-2020
कविता:- आधुनिक प्यार की परिणाम
ज़िन्दगी में बहार है , सुखों का पहाड़ है ,
मोहब्बत की दरिया दिल से बह रही है.
ख्यालों में तो हमेशा वही रह रही हैं ,
उन्हें पता भी नहीं, और हम रोशन पर आशिक़ी चल रही है.
वह दूसरों के बाहों में झुल रही है,
हमारे दिल में अरमान फल फूल रही है.
वह किसी के होंठों के रस को पीती है,
हम उनके ख्यालों में ही जीते हैं,
वह सफल पायी किसी के प्यार में ,
हम धोखा पाये उसी के ख्याल में,
कल तो वह घुमेगी कार में,
हम रोयेंगे बाज़ार में !
वह कल जनसंख्या बढ़ायेगी, किसी के प्रेम लुटाकर ,
हम जनसंख्या नियंत्रित करेंगे खुद को मिटाकर
® ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
सुरेन्द्रनाथ इवनिंग कॉलेज , कोलकाता
26-03-2017 रविवार मो:-6290640716
রোশন কুমার ঝা, Roshan Kumar Jha
26-03-2017 रविवार 12 राजनीतिक विज्ञान की 27
परीक्षा,नेहा को पढ़ाये 11, भारत एक नज़र समाचार पत्र
सच्चाई की ललकार में प्रकाशित (रोशन ) आज का 27-04-2020 सोमवार कविता :-16(07)
http://roshanjha9997.blogspot.com/2020/04/1607.html
यह Redmi 3 S : - 5 वां ( Redmi 7A से Bluetooth से लिए ।देखे :- 16(51)
http://roshanjha9997.blogspot.com/2020/06/1651pmkvy.html
https://kalamlive.blogspot.com/2020/06/khuli-bazar.html