कविता :- 15(92) हिन्दी -: हे कोरोना तेरे खिलाफ हूं ! ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳

कविता:-15(92) हिन्दी ✍️ रोशन कुमार झा 🇮🇳
Roshan Kumar Jha ,রোশন কুমার ঝা,
http://roshanjha1999.blogspot.com/2020/04/1592.html
15-04-2020  बुधवार 21:57 (मो-6290640716)

-: 🙏  हे कोरोना तेरे खिलाफ हूं  ! 🙏

हें वृहान की पुत्र कोरोना, मैं रोशन हम
भारतीय तेरे खिलाफ हूं ,
वृहान का ही नहीं, तुम्हारे चाइना का बाप हूं !
सही के लिए शीतल, गलत के लिए ताप हूं ,
तब समझ जा कैसा मैं भाप हूं !

जो अपने भाप से ही उड़ा सकता हूं ,
हे कोरोना हम भारतीय जग चुके है अब तुझे
भूला सकता हूं !
और चीन तुझे रूला सकता हूं ,
वक्त आने दे, जिस मोड़ पर जा रहा है न
उसी मोड़ से तुझे मुड़ा सकता हूं !

बनना चाहता है तू शक्तिशाली ,
भूल गया धर्म-कर्म हमारी !
हे चीनी कहां निभाया तू यारी ,
कल से आज तक तू बढ़ा है करके अत्याचारी !

             ✍️•••••• रोशन कुमार झा    🇮🇳

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